हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस्फहान के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद यूसुफ़ तबातबाई निजाद ने माहे-मुबारक रमज़ान में अपने ख़ुत्बात के छठे जलसे में, नहजुल-बलाग़ा के ख़ुत्बा 193 की रौशनी में मुत्तक़ीन के क़ीमती औसाफ़ की तशरीह की और फ़ज़ाइल-ए-अख़लाक़ी व मआनवी से शिनाख़्त व इत्तिसाफ़ की अहमियत पर तौज्जोह दिलाई।
इस्फहान के इमाम ए जुमआ ने मुक़द्दमे के तौर पर इस हक़ीक़त की तरफ़ इशारा किया कि अल्लाह तआला अपनी ज़ात में बंदों की इबादत से बे-नियाज़ है और इंसानों की मआसियत से उसे कोई नुक़सान नहीं पहुँचता। उन्होंने कहा कि ख़ुदा-ए-मुतआल तमाम सिफ़ात-ए-कमाल में बे-निहायत है; इंसान गुनाह करे या सवाब कमाए, उसकी ज़ात पर कोई असर नहीं पड़ता।
उन्होंने मज़ीद कहा कि अगर तमाम आलम गुनाहगार हो जाएँ तो भी ख़ुदा से कुछ कम नहीं होगा, और अगर सारे जहान इबादत में मशग़ूल हो जाएँ तो भी उसकी ज़ात में कोई इज़ाफ़ा नहीं होगा।नुमाइंदा-ए-वली-ए-फ़क़ीह इस्फहान ने मुत्तक़ीन के औसाफ़ बयान करते हुए कहा कि उनकी एक अहम ख़ुसूसियत यह है कि वह दुनिया में अहले-फ़ज़ीलत होते हैं, नेकियों का तआक़ुब करते हैं और बुराइयों से इज्तिनाब करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुत्तक़ीन की गुफ़्तगू सवाब के मुताबिक़ होती है और लग़्व, झूठ व ग़ीबत से पाक होती है। उनकी बातें दुरुस्त इस्तिदलाल पर मबनी होती हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि मुत्तक़ीन की एक और सिफ़त यह है कि उनका लिबास मुअतदिल होता है न बहुत पुराना और न ऐसा जो उन्हें नुमायाँ बना दे। वह दूसरों के साथ तवाज़ो और मेहरबानी से पेश आते हैं और तकब्बुर उनसे दूर होता है।
आयतुल्लाह तबातबाई निजाद ने हराम चीज़ों की तरफ़ नज़र उठाने से परहेज़ और बेहूदा बातों को सुनने से इज्तिनाब को भी मुत्तक़ीन की सिफ़ात में शुमार किया। उन्होंने तसरीह की कि उनकी समाअत उन बातों की तरफ़ होती है जो उनके लिए मुफ़ीद हों और उनके इल्म में इज़ाफ़ा करें।
उन्होंने कहा कि अहले-तक़वा ख़ुशी और सख़्ती दोनों हालात में अपनी रूहानी कैफ़ियत को यकसाँ रखते हैं। फ़क़्र हो या दौलत, उनके नफ़्स और रूह में इस्तिक़ामत पाई जाती है। उनका ईमान अल्लाह और आख़िरत पर इस क़दर गहरा होता है कि अगर मौत का वक़्त मुक़र्रर न होता, तो ख़ौफ़-ए-ख़ुदा से उनकी रूह जिस्म से जुदा हो जाती।
इमाम ए जुमआ इस्फहान ने ताकीद की मुत्तक़ीन अल्लाह को सही मआनियों में पहचानते हैं और जानते हैं कि हर चीज़ उसी की मिल्कियत है। उनकी निगाह में अल्लाह की अज़मत इतनी बुलंद होती है कि तमाम आलम उनके सामने हक़ीर व नाचीज़ नज़र आता है।
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